आगरा। आईएसबीटी के सामने रविवार शाम हुए दर्दनाक सड़क हादसे में एसएन मेडिकल कॉलेज के दो एमबीबीएस छात्रों की मौत हो गई। तेज रफ्तार कार की टक्कर के बाद उनकी बाइक डिवाइडर से जा भिड़ी और दोनों गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। हादसे के बाद इलाके में अफरा–तफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन समय हाथ से निकल चुका था। मृत छात्रों की पहचान एसएन मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस बैच-2022 के विद्यार्थी सिद्ध गर्ग और तनिष्क गुप्ता के रूप में हुई है। सिद्ध गर्ग 22 वर्ष का था और विमल वाटिका, कमला नगर में रहता था, जबकि तनिष्क गुप्ता हरदोई का रहने वाला था और कॉलेज कैम्पस से बाहर किराए के कमरे में रहता था। रविवार शाम दोनों अपने एक साथी को बोदला छोड़कर बाइक से लौट रहे थे। सिकंदरा से भगवान टॉकीज की ओर जाने वाले मार्ग पर जैसे ही वे आईएसबीटी के सामने पहुंचे, तभी पीछे से आई तेज रफ्तार कार ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सीधा डिवाइडर से टकरा गई, कार भी नियंत्रण खोकर डिवाइडर से टकराई और दोनों छात्र गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े।
हादसे की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में मेडिकल कॉलेज के छात्र भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को एंबुलेंस से एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दोनों के परिवारों में कोहराम मच गया है। सिद्ध गर्ग के परिजन तुरंत एसएन कॉलेज पहुंच गए, वहीं तनिष्क गुप्ता के बारे में पता चला कि वह कुछ समय पहले ही परीक्षा खत्म होने के बाद घर जाने की तैयारी कर रहा था। एमबीबीएस बैच-2022 की परीक्षाएं हाल ही में समाप्त हुई थीं और कई साथी छात्र अपने घरों को लौट चुके थे, लेकिन अब कॉलेज परिसर में मातम पसरा है। सिद्ध और तनिष्क दोनों को बहुत अच्छा दोस्त माना जाता था और दोनों ने मेडिकल करियर के सपने साथ-साथ देखे थे। वह दोस्ती अब सड़क हादसे की भेंट चढ़ गई। इस हादसे के बाद एक और गंभीर सवाल उठ खड़ा हुआ है कि शहर में रोड एक्सीडेंट में गंभीर रूप से घायल युवाओं को पहले प्राइवेट हॉस्पिटल क्यों नहीं लिया जाता? क्यों ऐसे केसों को स्वीकार करने के बजाय सीधे मेडिकल कॉलेज भेज दिया जाता है? क्या समय रहते प्राइवेट अस्पताल ऐसे घायलों को भर्ती कर लें तो उनकी जान बचाई जा सकती है? आखिर यह व्यवस्था क्यों नहीं बनती कि सड़क हादसे में घायल किसी भी व्यक्ति को नज़दीकी निजी अस्पताल तत्काल प्राथमिक इलाज दे, चाहे मामला पुलिस का हो या नहीं? यह भी सवाल उठता है कि सिकंदरा से एसएन मेडिकल कॉलेज पहुंचने में लगभग एक घंटे का समय क्यों लगता है और इस देरी में कितनी ज़िंदगियाँ रास्ते में ही दम तोड़ देती हैं? ये सवाल आज सिर्फ एक हादसे के नहीं, बल्कि पूरे शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की गंभीर खामियों पर चोट कर रहे हैं।
विस्तार : रविवार शाम आगरा–कानपुर नेशनल हाईवे पर आईएसबीटी कट के पास हुए दिल दहला देने वाले सड़क हादसे ने एसएन मेडिकल कॉलेज और दो परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया। एमबीबीएस तृतीय वर्ष के दो छात्र—22 वर्षीय सिद्ध गर्ग निवासी विमल वाटिका, कमला नगर और 22 वर्षीय तनिष्क गुप्ता निवासी हरदोई—अपाचे बाइक से सिकंदरा से भगवान टाकीज की ओर लौट रहे थे। तभी पीछे से आई एक तेज रफ्तार कार ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक अनियंत्रित होकर सीधे डिवाइडर से जा भिड़ी और दोनों छात्र सड़क पर दूर जा गिरे।
◼️ आधा घंटे तक सड़क पर तड़पते रहे दोनों, भीड़ तमाशा देखती रही
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद दोनों छात्र करीब आधा घंटा सड़क पर पड़े रहे। भीड़ जुट गई, मोबाइल से वीडियो भी बनाए गए, लेकिन किसी ने उन्हें अस्पताल ले जाने की हिम्मत नहीं दिखाई। आखिरकार एक राहगीर ने 112 पर सूचना दी। पीआरवी पहुंची तो दोनों को ई-रिक्शा से पास के निजी अस्पताल भेजा गया। लेकिन तब तक “गोल्डन आवर” निकल चुका था। निजी अस्पताल से रेनबो हॉस्पिटल और वहां से एसएन इमरजेंसी रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
◼️ हेलमेट क्षतिग्रस्त, बाइक सही—गति और टक्कर की ताकत का प्रमाण
हादसे में छात्रों का हेलमेट टूट गया था, जबकि बाइक लगभग सुरक्षित मिली। पुलिस का मानना है कि टक्कर तेज रफ्तार में ही हुई होगी, तभी डिवाइडर भी क्षतिग्रस्त मिला है।
“लोग समय पर मदद करते तो मेरे बेटे की जान बच सकती थी” — सिद्ध के पिता राजेश फूट-फूटकर रो पड़े
विमल वाटिका निवासी राजेश अग्रवाल, जो जनरेटर पार्ट्स की फैक्ट्री चलाते हैं, बेटे सिद्ध की मौत की खबर पाकर टूट गए। उनका दर्द हृदय विदारक था।
उन्होंने कहा— “दोनों बच्चे आधे घंटे सड़क पर पड़े रहे, लोग तमाशा देखते रहे। किसी ने उठाकर अस्पताल नहीं पहुँचाया। आज मेरा बेटा गया है… कल किसी और का बेटा जाएगा।” परिजन घटनास्थल, फिर अस्पताल–अस्पताल दौड़ते रहे, पर सिद्ध और तनिष्क दोनों ने दम तोड़ दिया।
👨⚕️ दोनों की गहरी दोस्ती, हाल ही में परीक्षा खत्म हुई थी — तनिष्क दो दिन बाद घर जाने की तैयारी में था…
दोनों छात्र एमबीबीएस बैच 2022 के थे।
दोनों की परीक्षा कुछ दिन पहले ही समाप्त हुई थी।
तनिष्क अपने पीजी में रहता था जबकि सिद्ध घर से आते-जाते थे। दोनों अक्सर साथ ही निकला करते थे। परिवारों को भी उनकी दोस्ती के बारे में जानकारी थी।रविवार दोपहर दोनों घर से निकले थे। तनिष्क घर जाने की तैयारी कर रहा था—लेकिन इससे पहले ही जिंदगी ने उससे सब कुछ छीन लिया।
👵 दादी का सपना था कि सिद्ध डॉक्टर बने — सपना अधूरा रह गया…
सिद्ध की दादी विद्या देवी की इच्छा थी कि उनका पोता डॉक्टर बने। बड़े भाई अक्षत इंजीनियर बने, तो सिद्ध ने दादी का सपना पूरा करने का फैसला कर लिया। एनईईटी की कठिन तैयारी करके मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाया।
आज वही सपना सड़क पर टूटकर बिखर गया।
🩺 एसएन मेडिकल कॉलेज में मातम—सैकड़ों छात्र रात तक इमरजेंसी में जुटे
हादसे की खबर फैलते ही एसएन मेडिकल कॉलेज में अफरा-तफरी मच गई।
छात्र-छात्राएं, फैकल्टी और जूनियर्स–सीनियर्स भारी संख्या में इमरजेंसी पहुँचे।
दो साथी छात्रों की मौत ने पूरे कॉलेज को शोक में डुबो दिया।
🚔 पुलिस जांच में क्या निकला?
इंस्पेक्टर नीरज शर्मा के अनुसार—
डिवाइडर टूटा हुआ मिला है
प्राथमिक जांच में पीछे से टक्कर की पुष्टि
सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं
टक्कर मारने वाली कार की तलाश जारी
पुलिस का अनुमान — “संभावना है कि कार ने ओवरस्पीड या कट मारा, जिससे बाइक असंतुलित हुई और डिवाइडर से टकरा गई।”
⚠️ गोल्डन आवर का नुकसान : समय पर उपचार न मिलना बना मौत की बड़ी वजह
सड़क हादसों में पहला एक घंटा—गोल्डन आवर—सबसे अहम होता है।
मगर यहाँ—
लोग मदद को आगे नहीं आए
इमरजेंसी सेवा देर से पहुँची
एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक ले जाने में कीमती समय निकल गया
यह देरी दोनों छात्रों की जान ले गई।
🛑 एक ही दिन में दो परिवारों की दुनिया उजड़ गई
एक माँ शाम को बेटे के लौटने का इंतज़ार करती रह गई
दादी अपने सपने का चूर होना देख न सकीं
पिता अस्पताल–अस्पताल बेटे को बचाने की कोशिश करते दौड़ते रहे
तनिष्क के घर में भी मातम पसरा हुआ है। उनका परिवार हरदोई में बेटे की घर वापसी की तैयारी कर रहा था।
📌 यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहर की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है
आईएसबीटी कट पर—
तेज रफ्तार
लापरवाह ड्राइविंग
टूटा डिवाइडर
पुलिस पेट्रोलिंग की कमी
—इन सबने मिलकर दो होनहार युवाओं की जान ले ली।
शहर में ऐसे कट, ब्लाइंड–स्पॉट और ओवरस्पीड पॉइंट की जाँच की जरूरत है, जहाँ आए दिन हादसे हो रहे हैं।

