आगरा। हाथरस जिले के सादाबाद ब्लॉक अंतर्गत जारऊ गांव में स्थित गौशाला में गोवंशों की स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है। इलाज, चारा और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में गोवंश तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार बीते कुछ समय में बीमारी की चपेट में आकर एक दर्जन से अधिक गोवंशों की मौत हो चुकी है, लेकिन जिम्मेदारों ने अब तक हालात सुधारने की कोई ठोस पहल नहीं की। इस पूरे मामले में ग्राम प्रधान की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला की सीधी जिम्मेदारी ग्राम प्रधान पर होने के बावजूद न तो समय पर पशु चिकित्सकों को बुलाया गया, न ही बीमार गोवंशों के इलाज, हरे चारे और दवाइयों की समुचित व्यवस्था की गई। साफ-सफाई की स्थिति भी बदतर बताई जा रही है, जिससे बीमारी के फैलने का खतरा और बढ़ गया है।हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृत गोवंशों का न तो विधिवत पोस्टमार्टम कराया गया और न ही सम्मानजनक ढंग से अंतिम संस्कार। कई मामलों में केवल खानापूर्ति के लिए अधूरा दफन किया गया, जिसके चलते कुत्ते शवों को खींचते हुए नजर आए।
गौशाला परिसर में खुले में पड़े शव प्रशासन और ग्राम पंचायत दोनों की संवेदनहीनता को उजागर कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पशु चिकित्सक अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि गोवंश किस बीमारी से दम तोड़ रहे हैं। यदि समय रहते किसी एक गोवंश का भी पोस्टमार्टम कराया जाता, तो बीमारी की पहचान कर बाकी गोवंशों को बचाया जा सकता था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान, पशु चिकित्सक, बीडीओ और सेक्रेटरी की संयुक्त लापरवाही से यह स्थिति पैदा हुई है।
मामले की जानकारी मिलने पर बजरंग दल के आगरा व हाथरस जिला स्तर के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार गोवंश संरक्षण के लिए लाखों रुपये का फंड भेजती है, लेकिन जारऊ गौशाला में न तो हरा चारा उपलब्ध है, न बीमार गोवंशों को उठाने की व्यवस्था, न समय पर इलाज और न ही मृत गोवंशों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार किया जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि हाथरस जिलाधिकारी इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाते हैं। क्या लापरवाह ग्राम प्रधान, पशु चिकित्सक, बीडीओ और सेक्रेटरी पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर गोवंशों की मौत का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा। जारऊ गौशाला में गोवंशों की यह दुर्दशा न केवल प्रशासनिक तंत्र की विफलता को उजागर करती है, बल्कि ग्राम पंचायत स्तर पर जिम्मेदारियों के निर्वहन पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि इस गंभीर मामले में प्रशासन कब और क्या ठोस कदम उठाता है।

