एत्मादपुर प्रकरण: विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंपी, महिला एसआई के ऑडियो की जांच करेंगे एडीसीपी

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आगरा लाईव न्यूज। नर्सिंग छात्रा से छेड़छाड़ के मुकदमे में चार आरोपितों के नाम हटाए जाने को लेकर प्रसारित ऑडियो से पुलिस की किरकिरी होने के बाद वरिष्ठ अधिकारी एक्शन मोड में आ गए हैं। पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने एत्मादपुर थाने में दर्ज इस प्रकरण की विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंप दी है, जबकि महिला सब इंस्पेक्टर के ऑडियो की जांच अपर पुलिस आयुक्त (एडीसीपी) को सौंपी गई है। वहीं मीडिया सेल की ओर से जारी बयान में इंस्पेक्टर एत्मादपुर को क्लीन चिट देते हुए महिला विवेचक के आरोपों को गलत बताया गया है। मामला ट्रांस यमुना थाना क्षेत्र की एक नर्सिंग छात्रा से जुड़ा है, जिसके साथ 30 सितंबर और 17 अक्टूबर को छेड़छाड़ की घटनाएं हुई थीं। पीड़िता ने 25 अक्टूबर को एत्मादपुर थाने में छह युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इस मुकदमे की विवेचक महिला दारोगा नीतू शर्मा थीं। सोमवार को उनका एक ऑडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुआ, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि इंस्पेक्टर एत्मादपुर आलोक सिंह ने उन्हें बिना बताए चार आरोपितों के नाम मुकदमे से निकलवा दिए और इसके पीछे लेन-देन की बात भी कही गई।

ऑडियो वायरल होते ही मामला तूल पकड़ गया। इसके बाद मंगलवार को पुलिस मीडिया सेल के माध्यम से आधिकारिक बयान जारी किया गया। बयान में कहा गया कि महिला विवेचक नीतू शर्मा ने स्वयं 16 दिसंबर को अपने हस्तलेख में एसीपी एत्मादपुर को पत्र लिखकर यह उल्लेख किया था कि जांच में चार आरोपितों की नामजदगी गलत पाई गई है और उनके नाम हटाने की अनुमति मांगी गई थी। एसीपी से अनुमोदन मिलने के बाद ही चार आरोपितों के नाम मुकदमे से हटाए गए। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि इंस्पेक्टर एत्मादपुर की भूमिका इस मामले में संदिग्ध नहीं पाई गई है, इसलिए उन्हें क्लीन चिट दी गई है। पुलिस के अनुसार, छह आरोपितों में से दो आशुतोष और अनूप कुमार निवासी करहल, मैनपुरी के खिलाफ 16 दिसंबर को ही चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी। वहीं प्रसारित ऑडियो में विवेचक द्वारा पीड़िता से यह कहना कि इंस्पेक्टर ने चारों नाम निकलवा दिए और उन्हें बाद में जानकारी हुई, पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। उधर, वादी द्वारा विवेचना से संतुष्ट न होने की बात सामने आने के बाद पुलिस आयुक्त ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए विवेचना क्राइम ब्रांच की महिला सब इंस्पेक्टर को सौंप दी है। साथ ही ऑडियो प्रकरण की जांच अपर पुलिस आयुक्त रामबदन सिंह को दी गई है।

इसी बीच किरावली थाने के एक अन्य मामले ने भी पुलिस महकमे को कठघरे में खड़ा कर दिया है। हत्या के शक में पूछताछ के नाम पर 21 दिसंबर को किरावली क्षेत्र के करहारा निवासी राजू के साथ कथित रूप से बर्बरता की गई। आरोप है कि थाने में उल्टा लटकाकर इतनी पिटाई की गई कि उसके दोनों पैर टूट गए। इस मामले में एसओ किरावली नीरज कुमार समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। पीड़ित के स्वजन ने डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा को तहरीर देकर पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है, लेकिन आठ दिन बीतने के बाद भी अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं हो सका है। पुलिस आयुक्त ने किरावली प्रकरण की जांच भी अपर पुलिस आयुक्त रामबदन सिंह को सौंपी है। उनका कहना है कि अभी कुछ लोगों के बयान शेष हैं और जांच पूरी होने में तीन दिन का समय और लगेगा। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। लगातार सामने आ रहे इन मामलों और ऑडियो के कारण पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं अधिकारियों का कहना है कि सभी प्रकरणों में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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