आगरा लाईव न्यूज। आगरा के सरोजिनी नायडू (एसएन) मेडिकल कॉलेज में गुर्दा रोगियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से बनी सुपरस्पेशियलिटी विंग में नए साल 2026 से किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने जा रही है। इसके लिए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) के कार्यालय से औपचारिक अनुमति जारी कर दी गई है। चिकित्सकों का प्रशिक्षण पूरा होते ही मार्च–अप्रैल 2026 से गुर्दा प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इससे आगरा और आसपास के जिलों के मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लखनऊ, दिल्ली या अन्य बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत एसएन मेडिकल कॉलेज में 200 करोड़ रुपये की लागत से सुपरस्पेशियलिटी विंग का निर्माण किया गया है। इस विंग में न्यूरो सर्जरी, यूरो सर्जरी और गैस्ट्रो सर्जरी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं पहले से संचालित हो रही हैं। इसी विंग में गुर्दा रोगियों के लिए डायलिसिस सेंटर भी स्थापित किया गया है, जहां वर्तमान में 14 मशीनों के माध्यम से प्रतिदिन 40 से अधिक मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। गुर्दा रोगियों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण डायलिसिस के लिए वेटिंग चल रही है, जिससे किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता और अधिक महसूस की जा रही थी। लगातार बढ़ते मरीजों को देखते हुए एसएन मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने करीब दो वर्ष पहले गुर्दा प्रत्यारोपण की अनुमति के लिए आवेदन किया था। इस दौरान कई विशेषज्ञ टीमों ने एसएन का निरीक्षण किया और आवश्यक व्यवस्थाओं का सर्वे किया। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद डीजीएमई द्वारा अब किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति प्रदान कर दी गई है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता के अनुसार, नए साल 2026 में मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। इसके लिए एसएन के यूरोलॉजिस्ट और नेफ्रोलॉजिस्ट का प्रशिक्षण किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ में कराया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होते ही सुपरस्पेशियलिटी विंग में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू कर दिया जाएगा। एसएन में वर्तमान में चार यूरोलॉजिस्ट और चार नेफ्रोलॉजिस्ट तैनात हैं, जो मिलकर यह जटिल प्रक्रिया करेंगे। सुपरस्पेशियलिटी विंग में दो अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर भी पहले से मौजूद हैं। किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी तरह एसएन मेडिकल कॉलेज में ही होगी। इसके लिए अलग-अलग समितियां भी गठित की गई हैं। एसएन में केवल गुर्दा रोगी के परिजन की किडनी ही प्रत्यारोपण के लिए ली जाएगी। किसी बाहरी या अनजान व्यक्ति की किडनी का ट्रांसप्लांट नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत आने वाले मरीजों और असाध्य रोग निधि के लाभार्थियों का किडनी ट्रांसप्लांट पूरी तरह निःशुल्क किया जाएगा।
नेफ्रोलॉजी विभाग में ऐसे मरीजों की सूची तैयार की जा रही है, जिनके गुर्दे पूरी तरह खराब हो चुके हैं और जो लंबे समय से नियमित डायलिसिस करा रहे हैं। यदि इन मरीजों के परिजन किडनी दान के लिए तैयार होते हैं, तो सभी चिकित्सकीय और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर एसएन में ही किडनी ट्रांसप्लांट किया जाएगा। इसके लिए मरीजों को किसी अन्य शहर या संस्थान में अनुमति लेने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, पूरी प्रक्रिया एसएन मेडिकल कॉलेज में ही संपन्न की जाएगी। एसएन मेडिकल कॉलेज में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने से आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, हाथरस और आसपास के जिलों के हजारों गुर्दा रोगियों को बड़ा लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल मरीजों का समय और पैसा बचेगा, बल्कि समय पर उपचार मिलने से उनकी जीवन गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने दी एसएन को नई ऊर्जा, किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति से रचा स्वास्थ्य सेवाओं का नया अध्याय
एसएन मेडिकल कॉलेज की सुपरस्पेशियलिटी विंग में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने की दिशा में मिली अनुमति को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस सफलता के पीछे प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता की दूरदर्शी सोच, सतत प्रयास और प्रभावी नेतृत्व को अहम माना जा रहा है। उनके कार्यकाल में एसएन मेडिकल कॉलेज ने न सिर्फ आधारभूत ढांचे को मजबूती दी, बल्कि उन्नत और जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाओं की ओर तेज़ी से कदम बढ़ाए हैं। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता के नेतृत्व में एसएन मेडिकल कॉलेज को नई ऊर्जा मिली है। लंबे समय से लंबित पड़ी किडनी ट्रांसप्लांट जैसी महत्वपूर्ण सुविधा को साकार करने के लिए उन्होंने शासन स्तर तक लगातार संवाद किया और सभी तकनीकी व प्रशासनिक औपचारिकताओं को समयबद्ध तरीके से पूरा कराया।
परिणामस्वरूप महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा की ओर से गुर्दा प्रत्यारोपण की अनुमति मिल सकी। डॉ. प्रशांत गुप्ता के मार्गदर्शन में सुपरस्पेशियलिटी विंग को सक्रिय और मरीज-केंद्रित बनाया गया। डायलिसिस सेंटर की शुरुआत, न्यूरो, यूरो और गैस्ट्रो सर्जरी जैसी सेवाओं का विस्तार और अब किडनी ट्रांसप्लांट की स्वीकृति—ये सभी कदम एसएन को प्रदेश के अग्रणी मेडिकल संस्थानों की कतार में खड़ा कर रहे हैं। आज एसएन में प्रतिदिन 40 से अधिक डायलिसिस होना, बढ़ती मरीज संख्या के बावजूद सेवाओं का सुचारू संचालन, इसी सक्रिय नेतृत्व का परिणाम माना जा रहा है।
चिकित्सकों के प्रशिक्षण को लेकर भी प्राचार्य ने स्पष्ट रणनीति अपनाई। यूरोलॉजिस्ट और नेफ्रोलॉजिस्ट को केजीएमयू, लखनऊ में विशेष प्रशिक्षण दिलाकर उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि किडनी ट्रांसप्लांट जैसी जटिल प्रक्रिया उच्चतम मानकों के अनुरूप हो। इससे न केवल मरीजों का भरोसा बढ़ा है, बल्कि मेडिकल कॉलेज की अकादमिक और चिकित्सकीय प्रतिष्ठा भी मजबूत हुई है।चिकित्सकों और कर्मचारियों का कहना है कि डॉ. प्रशांत गुप्ता के आने के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज में कार्यसंस्कृति में सकारात्मक बदलाव आया है। निर्णय लेने की गति तेज हुई है और मरीजों के हित को सर्वोपरि रखते हुए योजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है।
किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने से आगरा और आसपास के जिलों के हजारों मरीजों को राहत मिलेगी और यह एसएन के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होगी। कुल मिलाकर, प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता के नेतृत्व ने एसएन मेडिकल कॉलेज को नई दिशा और नई ऊर्जा दी है। उनकी पहल और प्रतिबद्धता से एसएन अब सिर्फ एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि अत्याधुनिक और भरोसेमंद उपचार केंद्र के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

