आगरा/एटा। राजा का रामपुर। राजा का रामपुर क्षेत्र के ग्राम पहरैया स्थित मां सरस्वती इंटर कॉलेज में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रीकृष्ण जन्म का दिव्य प्रसंग सुनाया गया। कथावाचक रजनेश शास्त्री ने जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का वर्णन किया, पूरा पंडाल भक्ति और आनंद से सराबोर हो उठा और “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। कथावाचक ने बताया कि जब देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो योगमाया के प्रभाव से कारागार के सभी पहरेदार गहरी नींद में सो गए और जेल के ताले अपने आप खुल गए। जिस कोठरी में देवकी और वासुदेव कैद थे, वहां अचानक दिव्य प्रकाश फैल गया और उनके सामने शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए चतुर्भुज भगवान प्रकट हुए। देवकी और वासुदेव भगवान के चरणों में गिर पड़े।
कथा के दौरान बताया गया कि भगवान ने देवकी-वसुदेव से कहा कि वे पुनः नवजात शिशु का रूप धारण कर रहे हैं और उन्हें उसी समय वृंदावन में अपने मित्र नंदजी के घर पहुंचा दिया जाए। साथ ही वहां जन्मी कन्या को मथुरा लाकर कंस के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया। इसके बाद वसुदेव नवजात शिशु श्रीकृष्ण को सूप में रखकर कारागार से निकले और अथाह यमुना नदी को पार कर नंदजी के घर पहुंचे। वहां उन्होंने शिशु को यशोदा माता के पास सुला दिया और कन्या को लेकर मथुरा लौट आए। इसके पश्चात कारागार के द्वार पुनः बंद हो गए।
श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनते ही श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और भक्ति में लीन हो गए। पूरे वातावरण में भजन, जयकारे और श्रद्धा की गंगा प्रवाहित होती रही।इस अवसर पर परीक्षित महेंद्र सिंह एवं भूदेवी, यज्ञपति अरविंद कुमार एवं भगवान श्री के साथ ही अजय, मंजू, संतोष, विनीता, रतनेश, प्रियंका सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी एवं श्रोता उपस्थित रहे। कथा के माध्यम से भक्तों को भक्ति, आस्था और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।

