न्याय की जीत: कुशवाह युवा मंच के संघर्ष से झुकी व्यवस्था, दूधिया को थर्ड डिग्री देने वाले चौकी प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुआ मुकदमा

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आगरा लाईव न्यूज। जीवनी मंडी पुलिस चौकी में दूधिया को थर्ड डिग्री दिए जाने के मामले में आखिरकार कानून ने खामोशी तोड़ दी है। लंबे समय तक दबाए गए इस गंभीर प्रकरण में चौकी प्रभारी रविंद्र कुमार समेत चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ छत्ता थाने में मुकदमा दर्ज होना केवल एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, जागरूकता और कुशवाह युवा मंच के निरंतर संघर्ष की ऐतिहासिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। यह मामला उस पुलिसिया व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है, जो पहले आरोपी पुलिसकर्मियों को बचाने का प्रयास करती रही। यह पूरा मामला सैंया के बाग किशोरा वीरई निवासी नरेंद्र कुशवाह से जुड़ा है, जो शहर में घर-घर दूध सप्लाई कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। दो जनवरी को नरेंद्र अपने बड़े भाई धीरज के साथ दूध बांटने शहर आया था। गरीब नगर क्षेत्र में टेंपो खड़ा कर बड़ा भाई दूध देने चला गया, तभी जीवनी मंडी पुलिस चौकी प्रभारी रविंद्र कुमार अपने सहयोगी पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने नरेंद्र से टेंपो को जीवनी मंडी पुलिस चौकी तक ले जाने को कहा, लेकिन टेंपो खराब होने के कारण नरेंद्र ने असमर्थता जताई।

आरोप है कि इसी बात पर चौकी प्रभारी रविंद्र कुमार और उनके साथ मौजूद पुलिसकर्मी बौखला गए। नरेंद्र को बाइक पर बैठाकर जबरन जीवनी मंडी पुलिस चौकी ले जाया गया, जहां उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। चौकी के भीतर दारोगा सनी, हेड कांस्टेबल संजय और कांस्टेबल राज विहारी के साथ मिलकर नरेंद्र को डंडों और प्लास से बेरहमी से पीटा गया। पिटाई इतनी भीषण थी कि दो डंडे टूट गए और तलवों पर लगातार वार से उसके पैरों में गंभीर सूजन आ गई। पिटाई के बाद पुलिस ने मामले को दबाने के उद्देश्य से शांतिभंग की कार्रवाई दिखाते हुए नरेंद्र का मेडिकल कराया। आरोप है कि इस दौरान उसे डराया-धमकाया गया और डॉक्टरों को चोट न बताने का दबाव बनाया गया। दहशत के कारण नरेंद्र उस समय अपनी चोटों के बारे में खुलकर नहीं बता सका, वहीं मेडिकल रिपोर्ट में भी कई गंभीर चोटों का उल्लेख नहीं किया गया।

इसके बाद पीड़ित नरेंद्र और उसके परिवार को लगातार पुलिस चौकियों और थानों के चक्कर काटने पड़े। सामाजिक दबाव और कुशवाह युवा मंच के हस्तक्षेप के बाद 12 दिन बाद 14 जनवरी को नरेंद्र का री-मेडिकल कराया गया, जिसमें उसके पैर में तीन स्थानों पर चोट की पुष्टि हुई। यह चोटें पहले कराए गए मेडिकल में दर्ज नहीं थीं, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। मामला जब तूल पकड़ने लगा तो कुशवाह युवा मंच सक्रिय रूप से सामने आया। भाजपा आगरा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष गिर्राज सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में कुशवाह युवा मंच के पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से भेंट कर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान मंच के अध्यक्ष को पुलिस द्वारा नजरबंद तक कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद संगठन ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ी नाराजगी जताई और तत्काल मुकदमा दर्ज करने के स्पष्ट निर्देश दिए। बावजूद इसके स्थानीय पुलिस ने आदेशों की अनदेखी करते हुए एफआईआर दर्ज नहीं की, जिससे पुलिस की मंशा पर सवाल और गहरे हो गए। इसके बाद कुशवाह युवा मंच का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रामबदन सिंह से मिला और उपमुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद मुकदमा दर्ज न होने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रामबदन सिंह ने तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद छत्ता थाना पुलिस ने पीड़ित नरेंद्र कुशवाह के पिता ओमवीर कुशवाह की तहरीर पर चौकी प्रभारी रविंद्र कुमार, दारोगा सनी, हेड कांस्टेबल संजय और कांस्टेबल राज विहारी के खिलाफ मारपीट और गाली-गलौज की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।

घटना के सामने आने के बाद पुलिस आयुक्त द्वारा चौकी प्रभारी रविंद्र कुमार को पहले ही निलंबित किया जा चुका है, जबकि दारोगा सनी और दोनों सिपाहियों को लाइन हाजिर किया गया है। इन सभी पर पूर्ण निलंबन की तलवार भी लटक रही है। मामले की जांच एसीपी छत्ता शेषमणि उपाध्याय द्वारा की गई थी। डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। यह मामला उस दोहरे रवैये की भी ओर इशारा करता है, जहां किरावली थाने में राजू पंडित को उल्टा लटकाकर पैर तोड़ दिए जाने के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, जबकि यहां सामाजिक एकजुटता और संगठन के दबाव के चलते कार्रवाई संभव हो सकी।

कुशवाह युवा मंच ने इस पूरे घटनाक्रम को समाज की एकता, संघर्ष और जागरूकता की जीत बताते हुए कहा है कि जब अन्याय के खिलाफ संगठित आवाज उठती है, तो सत्ता और व्यवस्था को भी झुकना पड़ता है। यह मामला आने वाले समय में पुलिसिया अत्याचार के खिलाफ एक बड़ी मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

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