आगरा लाईव न्यूज। पर्यटन की राजधानी कहा जाता है, लेकिन ताजमहल के बिल्कुल नजदीक बना ताजमहल मेट्रो स्टेशन आज नगर निगम की घोर लापरवाही का जीता-जागता सबूत बन चुका है। सुबह होते ही यह स्टेशन पर्यटकों का प्रवेश द्वार नहीं, बल्कि आवारा जानवरों की बड़ी मंडी नजर आने लगता है। शहर की साख पर दाग लगाने वाला यह दृश्य रोज़ सामने आता है—गाय, बैल और मवेशी बेखौफ होकर स्टेशन परिसर में घूम रहे हैं, और नगर निगम के अफसर आराम से बैठे हुए हैं। कोई कार्रवाई नहीं, कोई निगरानी नहीं… मानो आगरा की छवि की उन्हें कोई परवाह ही न हो।

ताजमहल देखने आने वाले विदेशी पर्यटक यहां अव्यवस्था देखकर दंग रह जाते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो प्रशासन की लापरवाही को दुनिया के सामने उजागर कर रहे हैं। सवाल यह है कि विश्व धरोहर के पास तक इतनी गंदगी और जानवरों का आतंक कैसे पहुंच जाता है? नगर निगम के अधिकारी हर बार कागज़ी जवाब देकर निकल लेते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ताजमहल मेट्रो स्टेशन पर सफाई से लेकर मॉनिटरिंग तक सबकुछ फेल है। स्टेशन के बाहर कीचड़, कूड़ा और जानवरों का कब्ज़ा—यह आगरा की पहचान बनने लगा है। सुबह 6 बजे की तस्वीर किसी भी जिम्मेदार शहर के लिए शर्म की बात होनी चाहिए। मेट्रो स्टेशन के बाहर से गुजरते यात्री जानवरों के झुंड के बीच से रास्ता बनाने को मजबूर हैं। सुरक्षा, सफाई और व्यवस्था तीनों पूरी तरह ठप नजर आती हैं। प्रश्न यह भी है कि आखिर नगर निगम की निगरानी टीमें किस काम की हैं?

क्या ताजमहल के आसपास की साफ-सफाई केवल कागजों में ही होती है? आगरा की छवि को धूमिल करने वाली यह अव्यवस्था प्रशासन की उदासी को साफ दिखा रही है। जिस शहर का नाम दुनिया भर के पर्यटक सम्मान से लेते हैं, उसी शहर में ताजमहल मेट्रो स्टेशन पर आवारा जानवर कब्जा जमाए बैठे हैं और नगर निगम सोया हुआ है।
अब सवाल साफ है—क्या जिम्मेदार अफसरों की आंखें तब खुलेंगी जब कोई बड़ा हादसा होगा? या पर्यटन नगरी की साख इसी तरह बदनाम होती रहेगी?

