महिला दरोगा का सनसनीखेज आरोप: इंस्पेक्टर ने छेड़छाड़ केस में चार आरोपियों के नाम हटाकर चार्जशीट लगाई…

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पीड़िता-विवेचक का ऑडियो वायरल, महिला दरोगा लाइन हाजिर, एत्मादपुर थाना फिर सवालों के घेरे में


आगरा लाईव न्यूज। थाना एत्मादपुर एक बार फिर गंभीर आरोपों और विवादों के कारण सुर्खियों में है। बुजुर्ग की पिटाई के मामले की जांच अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि अब छेड़छाड़ के एक मामले में चार आरोपियों के नाम चार्जशीट से हटाए जाने का आरोप सामने आया है। इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब पीड़िता और विवेचक रही महिला दरोगा की बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ऑडियो में महिला दरोगा इंस्पेक्टर और मुंशी पर रुपये लेकर आरोपियों को राहत देने जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाती सुनाई दे रही है। पीड़िता की शिकायत के बाद महिला दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया गया है, जबकि पुलिस अधिकारी पूरे प्रकरण की जांच कराने की बात कह रहे हैं। हालांकि, इस कार्रवाई के साथ ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल भी खड़े हो गए हैं।

क्या है पूरा मामला

थाना ट्रांस यमुना कॉलोनी के कालिंदी विहार क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता फिरोजाबाद के एक कॉलेज में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है। पीड़िता ने 25 अक्तूबर को थाना एत्मादपुर में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि 17 अक्तूबर को वह मायके से लौट रही थी, तभी एत्मादपुर निवासी सगे भाई आशुतोष और हिमांशु ने अपने साथियों अनूप और रितेश के साथ मिलकर उसे जबरन कार में बैठा लिया। पीड़िता के अनुसार आरोपियों ने दुष्कर्म का प्रयास किया, कपड़े फाड़ दिए और अश्लील हरकतें की। पीड़िता का कहना है कि उसी दौरान पुलिस की गाड़ी मौके पर पहुंच गई, जिससे आरोपी फरार हो गए। उसने यह भी बताया कि 30 सितंबर को भी आरोपियों ने रास्ते में उसके साथ अश्लील हरकत की थी। दूसरी घटना के लगभग आठ दिन बाद पीड़िता ने पुलिस से शिकायत की। मामले में आशुतोष, हिमांशु, अनूप, रितेश के अलावा अक्षय और सुमित के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। कुल छह आरोपी नामजद थे।

विवेचना और चार्जशीट पर उठा विवाद

मामले की विवेचना महिला उपनिरीक्षक नीतू कर रही थीं। 16 दिसंबर को मामले में आरोप पत्र दाखिल किया गया। इसके बाद एडीसीपी कार्यालय से पीड़िता से फीडबैक लिया गया, तब उसे जानकारी मिली कि चार आरोपियों के नाम चार्जशीट से हटा दिए गए हैं। यह जानकर पीड़िता हैरान रह गई। 17 दिसंबर को पीड़िता विवेचक महिला दरोगा से मिलने पहुंची। बातचीत के दौरान पीड़िता ने ऑडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो अब वायरल हो चुका है। इसी ऑडियो ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।

वायरल ऑडियो में क्या कहा :

वायरल ऑडियो में पीड़िता कहती है कि आरोपी उसे धमकी दे रहे हैं कि दस लाख रुपये देकर अपना नाम निकलवा देंगे और शिकायत करने पर घर में घुसकर मार देंगे। इस पर महिला दरोगा जवाब देती सुनाई देती हैं कि उन्हें घर भेजने के बाद इंस्पेक्टर ने चार लोगों के नाम हटाकर चार्जशीट दाखिल करा दी। महिला दरोगा ऑडियो में यह भी कहती हैं कि उन्होंने सभी आरोपियों को नामजद किया था, सभी के बयान लिए थे और उन्हें किसी तरह की कोई रकम नहीं मिली। बातचीत में इंस्पेक्टर पर पहले भी इसी तरह मामलों में नाम निकालने और मुंशी पर बिना पैसे कोई काम न करने के आरोप लगाए गए हैं। महिला दरोगा यह दावा भी करती हैं कि इंस्पेक्टर ऐसे मामलों में अकेले पैसे रख लेते हैं।

लाइन हाजिर और सफाई

ऑडियो वायरल होने और पीड़िता की शिकायत के बाद महिला दरोगा नीतू को लाइन हाजिर कर दिया गया। महिला दरोगा का कहना है कि 16 दिसंबर को वह रात साढ़े नौ बजे तक थाने में मौजूद थीं, लेकिन बच्चे की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें घर भेज दिया गया। उनका आरोप है कि उसी रात उनके बिना जानकारी दिए आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया।

इंस्पेक्टर से मुंशी तक पर आरोप

वायरल ऑडियो में महिला दरोगा केवल अपने थाने तक ही सीमित नहीं रहतीं, बल्कि आसपास के अन्य थानों में तैनाती के दौरान निरीक्षकों पर वसूली के आरोप भी लगाती हैं। ऑडियो में एसीपी, थाना प्रभारी यानी इंस्पेक्टर और मुंशी तक पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। अगले दिन चार्जशीट दाखिल होने की जानकारी मिलने पर पीड़िता ने दरोगा से विरोध जताया, जिसके बाद अगले ही दिन महिला दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया गया।

ये हैं बड़े सवाल :
इस पूरे प्रकरण ने पुलिस प्रशासन के सामने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं?
पीड़िता की असंतुष्टि के बावजूद चार्जशीट कैसे दाखिल हो गई?
चार आरोपियों के नाम हटने पर थाना प्रभारी की भूमिका क्या रही?
विवेचक से चार्जशीट दाखिल होने से पहले जवाब-तलब क्यों नहीं किया गया?
हाल ही में थाना प्रभारी पर बुजुर्ग को थप्पड़ मारने के आरोप लगे थे, उस मामले की जांच कहां तक पहुंची?
लगातार विवादों के बावजूद एत्मादपुर थाने की जवाबदेही क्यों तय नहीं हो पा रही?

बातचीत के अंश (वायरल ऑडियो से)

पीड़िता: “आरोपी मुझे धमकी दे रहे हैं कि दस लाख रुपये देकर नाम निकलवा देंगे और घर में घुसकर मार देंगे।”
महिला दरोगा: “मैं बेटे की कसम खाती हूं। मुझे घर भेजने के बाद इंस्पेक्टर ने चार लोगों के नाम हटा कर चार्जशीट लगा दी। पहले भी ऐसा कर चुके हैं। मुझे एक रुपया नहीं मिला है। मैंने सभी को आरोपी बनाया था।”
पीड़िता: “मैंने एडीसीपी से भी कहा था कि जेल भले मत भेजो, लेकिन सभी छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगनी चाहिए। मैं इंस्पेक्टर को कोर्ट तक घसीटूंगी।”
महिला दरोगा: “मेरे तुमसे परिवार जैसे संबंध हैं। मैंने मौके पर जाकर सबके बयान लिए थे। इंस्पेक्टर ऐसे ही करते हैं, अकेले सारे रुपये रख लेते हैं। मुंशी भी बिना पैसे लिए कोई काम नहीं करता। इंस्पेक्टर उसे हर महीने दस हजार रुपये देता है।”
पीड़िता: “एडीसीपी के फीडबैक कॉल पर ही पता चला कि चार्जशीट में नाम निकाल दिए गए हैं। तब भी मैंने तुम्हारे खिलाफ कुछ नहीं कहा।”
महिला दरोगा: “परेशान मत हो। मैं दूसरा मुकदमा दर्ज कराऊंगी और इन्हें जेल भेजूंगी। मेरी लिस्ट में ऐसे चार थाना प्रभारी हैं।”

पुलिस का पक्ष

डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा ने बताया कि पीड़िता की शिकायत और वायरल ऑडियो के आधार पर महिला दरोगा को लाइन हाजिर किया गया है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने एत्मादपुर थाने की कार्यप्रणाली को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है। वायरल ऑडियो के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप है और अब सभी की निगाहें जांच के निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं।

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