आगरा लाईव न्यूज। हाथरस बूलगढ़ी कांड के पीड़ित परिवार ने एक बार फिर अपनी पीड़ा और असुरक्षा को प्रशासन के सामने रखा है। बुधवार को पीड़ित परिवार हाथरस के जिलाधिकारी से मिला और बीते पांच वर्षों में झेली गई आर्थिक तंगी, सामाजिक अलगाव और मानसिक भय की स्थिति से अवगत कराया। परिवार ने साफ शब्दों में कहा कि यदि उन्हें हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप हाथरस से बाहर बसने और रोजगार का अवसर नहीं मिला, तो उनका सामान्य जीवन दोबारा पटरी पर लौट पाना मुश्किल होगा।
पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी को बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जो मुआवजा दिया गया था, वह लंबी कानूनी लड़ाई की पैरवी और पिछले पांच वर्षों के घरेलू खर्च में समाप्त हो चुका है। परिवार का कहना है कि लगातार कोर्ट-कचहरी के चक्कर और सुरक्षा कारणों से उनकी आमदनी का कोई स्थायी स्रोत नहीं बन पाया। वर्तमान हालात में बिना नियमित आय के एक-एक दिन गुजारना उनके लिए बेहद कठिन हो गया है। परिवार ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पिछले पांच साल से उन्हें सीआरपीएफ की सुरक्षा दी जा रही है, लेकिन यही सुरक्षा उनके लिए रोज़गार में सबसे बड़ी बाधा बन गई है। सीआरपीएफ सुरक्षा के कारण वे किसी भी स्थान पर सामान्य रूप से नौकरी नहीं कर पा रहे हैं। न तो निजी क्षेत्र में काम मिल पा रहा है और न ही स्थानीय स्तर पर कोई रोजगार संभव हो सका है, जिससे आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा है।
सबसे चिंताजनक स्थिति बच्चों की शिक्षा को लेकर सामने आई। परिवार ने बताया कि भय और असुरक्षा के माहौल के चलते उनके बच्चे पिछले पांच वर्षों से स्कूल नहीं जा पाए हैं। लगातार सुरक्षा घेरे और संभावित खतरे के डर ने बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप कर दी है, जिससे उनका भविष्य अंधकार में जाता दिख रहा है।पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी के समक्ष मांग रखी कि हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार उन्हें गाजियाबाद या नोएडा जैसे सुरक्षित स्थान पर आवास उपलब्ध कराया जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। परिवार का कहना है कि हाथरस से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर बसने से ही वे भयमुक्त जीवन जी सकेंगे और बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा।
गौरतलब है कि 14 सितंबर 2020 को हाथरस के बूलगढ़ी गांव में दलित समाज की 19 वर्षीय युवती के साथ कथित तौर पर चार युवकों द्वारा गैंगरेप की घटना सामने आई थी। गंभीर हालत में इलाज के दौरान युवती की मौत हो गई थी, जिसके बाद यह मामला देशभर में चर्चा और आक्रोश का विषय बना। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद 3 मार्च 2023 को अदालत ने तीन आरोपियों को बरी कर दिया था, जबकि एक आरोपी संदीप को गैर इरादतन हत्या के मामले में सजा सुनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पीड़ित परिवार को पिछले पांच वर्षों से सीआरपीएफ की सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया भले ही अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी हो, लेकिन उनका संघर्ष अब भी खत्म नहीं हुआ है। सुरक्षित आवास, स्थायी रोजगार और बच्चों की शिक्षा के बिना उनका जीवन आज भी असुरक्षा और अनिश्चितता के साये में गुजर रहा है। अब उनकी निगाहें प्रशासन और सरकार के फैसले पर टिकी हैं, जिससे उन्हें एक नई और भयमुक्त शुरुआत मिल सके।

