आगरा लाईव न्यूज। आगरा की जीवन मंडी पुलिस चौकी पर शनिवार को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए चौकी का घेराव किया। सपा नेताओं ने कुशवाहा समाज के नाबालिग बच्चों पर पुलिस द्वारा बर्बर अत्याचार किए जाने का आरोप लगाते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल मुकदमा दर्ज करने और पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान चौकी परिसर राजनीतिक नारेबाजी और हंगामे का केंद्र बना रहा। सपा नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने पूर्व अनुमति होने के बावजूद निर्दोष नाबालिगों पर कार्रवाई की और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया। नेताओं ने दावा किया कि बच्चों पर नाखून उखाड़ने जैसी क्रूरता भी की गई, जो सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है। चौकी पर ‘कुशवाहा समाज के बच्चों को न्याय दो’ और ‘पुलिस बर्बरता बंद करो’ जैसे नारों से माहौल गूंज उठा।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सपा महानगर अध्यक्ष स्विश अब्बास, जिला अध्यक्ष उदल सिंह कुशवाहा और नितिन कोहली ने पुलिस-प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि इस तरह की पुलिसिया ज्यादतियां पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास की खाई को और गहरा कर रही हैं। नेताओं ने कहा कि जीवन मंडी पुलिस चौकी अत्याचार का केंद्र बनती जा रही है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

सपा नेताओं ने चेतावनी दी कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तो पार्टी आंदोलन को और तेज करेगी। उनका कहना है कि यह मामला केवल कुछ बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कुशवाहा समाज के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। नाबालिगों पर कथित अत्याचार के इस प्रकरण ने शहर में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है और आगरा में उबाल की स्थिति बन गई है।
पूरी खबर विस्तार से…
मामला सैंया थाना क्षेत्र के गांव वीरई निवासी नरेंद्र कुशवाह का है। नरेंद्र और उसका भाई धीरज कुशवाह आगरा में टेंपो से दूध की सप्लाई करते हैं। नरेंद्र ने बताया कि उसे टेंपो चलाना नहीं आता और उसका भाई ही वाहन चलाता है। शनिवार को जीवनी मंडी क्षेत्र के गरीब नगर के बाहर उनका टेंपो खड़ा था। नरेंद्र टेंपो में बैठा था, जबकि उसका भाई गली में दूध देने गया हुआ था। इसी दौरान आसपास किसी बात को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि सूचना पर जीवनी मंडी चौकी इंचार्ज रविंद्र कुमार सिपाहियों के साथ मौके पर पहुंचे और कुछ लोगों को पकड़ लिया। उन्हें चौकी ले जाने के लिए टेंपो में बैठाने को कहा गया। नरेंद्र ने पुलिसकर्मियों को बताया कि वह टेंपो चलाना नहीं जानता है और उसका भाई ही इसे चलाता है। इसी बात पर पुलिसकर्मियों का पारा चढ़ गया और नरेंद्र के गाल पर थप्पड़ मार दिया गया। इसके बाद उसे जबरन चौकी ले जाया गया।

पीड़ित का आरोप है कि चौकी में उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। उसे बुरी तरह पीटा गया, पैरों के तलवों पर डंडे मारे गए और उसके अंगूठे का नाखून तक उखाड़ दिया गया। इसके बाद पुलिस ने उसका टेंपो सीज कर दिया और शांतिभंग की धाराओं में चालान कर दिया। आरोप है कि इसी दौरान दरोगा ने उसका मोबाइल फोन और जेब में रखे 1800 रुपये भी छीन लिए। घटना की जानकारी मिलने पर नरेंद्र के भाई ने अपने परिचित रिश्तेदार और भाजपा नेता प्रेम सिंह कुशवाह को पूरे मामले से अवगत कराया। उनके प्रयास से पुलिस लाइन से नरेंद्र की जमानत कराई गई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जमानत के बाद जब वे टेंपो, मोबाइल और नकदी वापस लेने थाने पहुंचे तो मोबाइल और रुपये लौटाने से साफ इनकार कर दिया गया।

पुलिस की पिटाई के कारण नरेंद्र की हालत खराब है और वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा है। घटना के बाद से वह भयभीत बताया जा रहा है। शनिवार को पीड़ित नरेंद्र कुशवाह ने अपने रिश्तेदार भाजपा नेता के साथ डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास से मुलाकात कर पूरी घटना की लिखित शिकायत की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीसीपी सिटी ने जीवनी मंडी चौकी इंचार्ज रविंद्र कुमार को तत्काल निलंबित कर दिया है। उनकी जगह गौरव राठी को नया चौकी प्रभारी बनाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था, हालांकि चौकी पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। कुशवाहा समाज के समर्थन में सपा का यह प्रदर्शन स्थानीय राजनीति में नई गर्माहट लेकर आया है और कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

