आगरा लाईव न्यूज। हरीपर्वत थाना क्षेत्र स्थित पालीवाल पार्क में तालाब में डूबकर 80 वर्षीय बुजुर्ग चरण सिंह की मौत ने एक बार फिर नगर निगम और पार्क प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर कर दिया है। यह हादसा केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उस अव्यवस्था का नतीजा है जो लंबे समय से पालीवाल पार्क में पनप रही है। पालीवाल पार्क में तालाब होने के बावजूद न तो किसी तरह की तैराकी या बचाव व्यवस्था है और न ही लाइफ गार्ड की तैनाती। तालाब के चारों ओर न चेतावनी बोर्ड लगे हैं और न ही मजबूत बैरिकेडिंग की गई है। ऐसे में बुजुर्गों, बच्चों और सुबह-शाम टहलने आने वालों की जान हर समय खतरे में बनी हुई है।

सूत्रों के अनुसार पार्क के भीतर स्थित बाल बिहार क्षेत्र अब बच्चों के मनोरंजन का स्थल न रहकर खुलेआम अय्याशी का अड्डा बन चुका है। यहां दिन-दहाड़े कपल आपत्तिजनक हालत में नजर आ जाते हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि परिवार और बुजुर्ग इस हिस्से में जाने से कतराने लगे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पार्क के ठीक बगल में पुलिस चौकी होने के बावजूद किसी को पुलिस का कोई डर नहीं है। न नियमित चेकिंग होती है और न ही असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चौकी सिर्फ नाम की रह गई है, जबकि पार्क के भीतर हालात बेलगाम हैं।

इसी तालाब में चलने वाली बोटिंग व्यवस्था भी बदहाली की मिसाल बनी हुई है। बोटिंग बोर्ड में हमेशा पानी भरा रहता है, चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा है। बोर्ड गंदगी से भरा पड़ा है और तालाब का पानी इतना दूषित हो चुका है कि पास खड़े होने पर बदबू आती है। इसके बावजूद संबंधित विभाग आंख मूंदे बैठा है और किसी भी स्तर पर सफाई या सुधार की चिंता नहीं दिखाई दे रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गंदगी, बदबू और अव्यवस्था के बीच बोटिंग कराना खुद में एक बड़ा खतरा है। किसी दिन कोई और बड़ा हादसा हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यह सवाल अब उठने लगे हैं।

बुजुर्ग की मौत के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं पर पड़ताल की बात कही जा रही है, लेकिन लोगों का गुस्सा पुलिस से ज्यादा पार्क प्रशासन और नगर निगम की उदासीनता को लेकर है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पालीवाल पार्क में तत्काल सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त की जाए, तालाब के आसपास पुख्ता इंतजाम हों, बाल बिहार में फैल रही अराजक गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई हो और बोटिंग क्षेत्र की नियमित सफाई व निगरानी सुनिश्चित की जाए। फिलहाल बुजुर्ग की मौत ने पालीवाल पार्क की बदहाल हकीकत को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से लेगा या फिर किसी और हादसे का इंतजार करेगा।

