जितेन्द्र कुशवाह क्राइम रिपोर्टर
आगरा लाईव न्यूज/औरैया। “जज धरती के भगवान होते हैं, अगर यहीं मुझे न्याय नहीं मिला तो ऊपर वाले से क्या मांगूं?” — यह शब्द किसी भाषण का हिस्सा नहीं, बल्कि उस विवाहिता की टूटी हुई पुकार हैं, जो इंसाफ की आस में दर-दर भटकने को मजबूर है। औरैया जनपद के थाना अजीतमल क्षेत्र की रहने वाली रंजन उर्फ रानी, पुत्री रामाधार, आज अपनी इज्जत, सुरक्षा और अधिकारों की लड़ाई अकेले लड़ रही है। पीड़िता के अनुसार उसकी शादी 3 जुलाई 2021 को अमन निवासी थाना चौबिया, जनपद इटावा से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही रिश्तों में कड़वाहट शुरू हो गई और वह मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना का शिकार होने लगी। इस दांपत्य जीवन से उनकी दो साल की मासूम बेटी ‘खुशी’ है, लेकिन बेटी की मासूम मुस्कान भी पति के दिल को नहीं पिघला सकी।
घर से निकाली गई दुल्हन, पति ने कानून को दिखाया ठेंगा : रंजन का आरोप है कि उसे ससुराल से बाहर निकाल दिया गया और बिना किसी तलाक या कानूनी प्रक्रिया के पति ने दूसरी शादी रचा ली। बताया जा रहा है कि दूसरी शादी से एक बच्चा भी है। उधर पहली पत्नी आज भी अपने हक और अपनी बेटी के भविष्य के लिए अदालतों के चक्कर काट रही है।
कोर्ट में मामला, फोन पर धमकियां : न्याय की आस में पीड़िता ने जब न्यायालय की शरण ली तो मामला कोर्ट में विचाराधीन हो गया। लेकिन इसी दौरान उसे लगातार फोन पर जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। पीड़िता का कहना है कि हर तारीख पर वह डर के साये में अदालत पहुंचती है, आशंका बनी रहती है कि कहीं उसकी आवाज़ हमेशा के लिए न दबा दी जाए।
पुलिस की भूमिका पर सवाल : पीड़िता का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। आरोपी और धमकी देने वाले बेखौफ हैं, खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि वह अपनी और मासूम बेटी की सुरक्षा के लिए गुहार लगा रही है। सवाल यह उठता है कि क्या किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही सिस्टम हरकत में आएगा?
न्याय व्यवस्था पर चोट करता सवाल : रंजन उर्फ रानी के शब्द आज पूरे समाज से सवाल कर रहे हैं—“धरती पर रहने वाले भगवान अगर मुझे न्याय नहीं दे पा रहे, तो ऊपर वाले भगवान से मैं क्या नया मांगूं?” यह सिर्फ एक महिला का दर्द नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जहां इंसाफ की आखिरी चौखट पर पहुंचकर भी पीड़ित खाली हाथ लौटता है।
कानून साफ है, अमल क्यों नहीं? कानून स्पष्ट कहता है कि पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करना अपराध है। धमकी देना और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालना भी गंभीर जुर्म है। इसके बावजूद पीड़िता पूछ रही है—कानून किताबों में तो है, लेकिन जमीन पर कब उतरेगा?
पीड़िता की मांग : पीड़िता ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपी पति पर तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, धमकी देने वालों को फौरन गिरफ्तार किया जाए, उसे और उसकी मासूम बेटी को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए और मामले की तेज सुनवाई कर उसे इंसाफ दिलाया जाए। यह कहानी सिर्फ रंजन उर्फ रानी की नहीं है। यह उन तमाम महिलाओं की आवाज़ है, जो शादी के बाद भी सुरक्षित नहीं हैं और जो आज सवाल कर रही है। अगर धरती पर इंसाफ नहीं मिला, तो भरोसा आखिर बचेगा कहां?

