आगरा लाईव। वैलेंटाइन डे पर जहां शहर में गुलाब, मोहब्बत और साथ निभाने के वादों की गूंज है, वहीं थाना एकता क्षेत्र के लोधई गांव से आई एक घटना ने “प्यार” के नाम पर रचे गए झूठ और धोखे का भयावह चेहरा उजागर कर दिया है। सात फेरों के बंधन और विश्वास की डोर से जुड़ा रिश्ता आधी रात को ऐसी साजिश का शिकार हुआ, जिसने एक परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया।लोधई गांव निवासी लवकेश अपनी पत्नी गौरी के साथ रहता था। वह रोजाना शहर में बिजली का काम कर रात में घर लौटता था। 9 फरवरी की रात भी वह काम से लौटकर घर आया और सो गया, लेकिन उसे क्या पता था कि यह उसकी जिंदगी की आखिरी रात होगी। पुलिस जांच में सामने आया कि गौरी का अपने ही रिश्ते में लगने वाले सुंदर तोमर से प्रेम संबंध था। लवकेश को इस रिश्ते पर शक हो गया था और इसी को लेकर दंपति के बीच आए दिन विवाद होता था। आरोप है कि इसी अवैध संबंध को बचाने के लिए गौरी और सुंदर ने मिलकर लवकेश को रास्ते से हटाने की साजिश रची।
बताया गया कि देर रात गौरी ने अपने प्रेमी को घर बुलाया। जब लवकेश गहरी नींद में था, तब दोनों ने मिलकर तकिए से उसका मुंह दबाया और दम घोंटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद घटना को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को पंखे से लटका दिया गया, ताकि मामला खुदकुशी लगे और किसी को शक न हो।तड़के करीब चार बजे गौरी ने ससुर को फोन कर रोते हुए बताया कि लवकेश ने फांसी लगा ली है। सूचना मिलते ही परिवार पहुंचा। पत्नी का रोना-बिलखना और घर में पसरा मातम देखकर किसी को साजिश का अंदेशा नहीं हुआ। सदमे में डूबे परिजनों ने बिना पुलिस कार्रवाई के अंतिम संस्कार कर दिया। हालांकि, कुछ बातें परिवार के मन में खटकती रहीं। शव के पैर जमीन को छू रहे थे, जिससे आत्महत्या की कहानी पर संदेह हुआ। दो दिन बाद परिजनों ने सख्ती से पूछताछ की तो गौरी टूट गई और पूरी साजिश कबूल कर ली। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। थाना एकता पुलिस ने आरोपी पत्नी गौरी और उसके प्रेमी सुंदर तोमर को हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।
वैलेंटाइन डे के अवसर पर सामने आई यह घटना एक कड़वा सच सामने लाती है—हर चमकता रिश्ता सच्चा नहीं होता। जब प्यार विश्वास और जिम्मेदारी से भटककर धोखे और स्वार्थ में बदल जाता है, तो उसका अंत अक्सर विनाशकारी होता है। लोधई गांव की यह वारदात याद दिलाती है कि झूठ और साजिश की नींव पर खड़ा कोई भी रिश्ता ज्यादा दिन टिक नहीं पाता, सच देर-सबेर सामने आ ही जाता है।

