होली वाले चौराहे पर ‘मौत का गड्ढा’! दो दिन में दो हादसे, बिना जांच रातों-रात भराई — नगर निगम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल

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आगरा लाईव। शहर के व्यस्त होली वाले चौराहे के पास सड़क धंसने की घटना ने नगर निगम की कार्यशैली और गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो दिन पहले यहां एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब अचानक सड़क धंस गई और एक ट्रैक्टर-ट्रॉली का पिछला पहिया गहरे गड्ढे में जा धंसा। ट्रॉली पर बैठा व्यक्ति कुछ सेकंड के अंतर से पहिए के नीचे आने से बचा। मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह चालक को संभाला, जिसके बाद स्थिति काबू में आई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और प्रशासन की सक्रियता पर सवाल उठने लगे। वीडियो वायरल होने के बाद नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और दिन में बैरिकेटिंग कर दी गई। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि सड़क धंसने के कारणों की तकनीकी जांच कराने के बजाय रात होते ही जेसीबी मशीन से गड्ढे को भरवा दिया गया। न तो यह स्पष्ट किया गया कि सड़क के नीचे सीवर लाइन टूटी थी, पानी की पाइपलाइन लीक थी या निर्माण में किसी तरह की खामी रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना मूल कारण जाने केवल मिट्टी डालकर गड्ढा बंद करना भविष्य के लिए और बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।

घटना के अगले ही दिन रात में एक और हादसा सामने आया। एक एक्टिवा सवार उसी स्थान पर असंतुलित होकर सड़क पर गिर पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यदि युवक ने हेलमेट नहीं पहना होता तो गंभीर चोट लग सकती थी। इससे यह साफ है कि गड्ढे की मरम्मत केवल औपचारिकता भर थी और सड़क की सतह पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाई गई। स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों का कहना है कि यह चौराहा शहर के प्रमुख मार्गों में शामिल है, जहां से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। यही नहीं, इसी मार्ग से कई आला अधिकारी भी आवागमन करते हैं, बावजूद इसके सड़क की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर इतनी बड़ी अनदेखी समझ से परे है। लोगों का आरोप है कि यदि वीडियो वायरल न होता तो शायद बैरिकेटिंग भी न होती।

क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि सड़क धंसने की वास्तविक वजह की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए और यदि निर्माण में लापरवाही या घटिया सामग्री का इस्तेमाल सामने आए तो जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो। फिलहाल सवाल यही है कि क्या नगर निगम किसी बड़े और जानलेवा हादसे के बाद ही सख्त कदम उठाएगा, या फिर शहर की सड़कों पर यूं ही खतरे मंडराते रहेंगे।

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