शिकोहाबाद (फिरोजाबाद)। लखनऊ एक्सप्रेसवे पर शुक्रवार देर रात हुए उस सड़क हादसे का मामला अब जांच के घेरे में आ गया है, जिसमें प्रदेश की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य की कार ट्रक की टक्कर से क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में मंत्री और उनके जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) आशीष सिंह को चोटें आई थीं। अब इस प्रकरण में एक्सप्रेसवे के अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोप है कि सड़क पर चल रहे मरम्मत कार्य के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन में भारी लापरवाही बरती गई, जिससे यह हादसा हुआ। पीआरओ आशीष सिंह की ओर से दी गई तहरीर के अनुसार, मंत्री बेबी रानी मौर्य शुक्रवार की रात हाथरस से सरकारी वाहन से लखनऊ जा रही थीं। इस दौरान उनका काफिला नसीरपुर थाना क्षेत्र में पहुंचा, जहां एक्सप्रेसवे की एक लेन पर मरम्मत का कार्य चल रहा था। यहां एक लेन से वाहनों को निकालने के लिए डायवर्जन बनाया गया था, लेकिन उसकी व्यवस्था बेहद लापरवाह थी।

तहरीर में कहा गया है कि डायवर्जन स्थल पर नीले रंग के ड्रम तो रखे गए थे, लेकिन उन पर रिफ्लेक्टिव लाइट या चेतावनी स्टीकर नहीं लगाए गए थे। न ही मौके पर कोई कर्मी या संकेतक बोर्ड मौजूद था। अंधेरे में यह व्यवस्था वाहनों के लिए खतरा साबित हुई। इसी बीच मंत्री की कार को ओवरटेक कर रहा एक ट्रक अचानक टायर फटने से अनियंत्रित हो गया और सीधा मंत्री की कार से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत यह रही कि कार चालक रामेंद्र कुमार की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया, अन्यथा मंत्री समेत काफिले के अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो सकते थे। दुर्घटना के बाद भी मौके पर एक्सप्रेसवे अथॉरिटी का कोई अधिकारी या कर्मचारी नहीं पहुंचा, जिससे मंत्री ने मौके पर ही नाराजगी जताई।
पीआरओ ने पुलिस को दी गई तहरीर में लिखा कि यह हादसा एक्सप्रेसवे के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही का परिणाम है। यदि डायवर्जन व्यवस्था सही होती, तो ऐसी दुर्घटना न होती। उन्होंने बताया कि यह लापरवाही किसी की जान भी ले सकती थी। इंस्पेक्टर नसीरपुर ज्ञानेंद्र सोलंकी ने बताया कि पीआरओ की तहरीर पर एक्सप्रेसवे के अधिकारी, कर्मचारियों और ट्रक चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब पूरे प्रकरण की जांच कर रही है।

गौरतलब है कि हादसे के बाद मंत्री बेबी रानी मौर्य ने भी सुरक्षा और सड़क व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि एक्सप्रेसवे जैसी उच्च स्तरीय सड़क पर यदि डायवर्जन या मरम्मत कार्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाएगी, तो यह यात्रियों की जान के लिए गंभीर खतरा है। पुलिस जांच के साथ अब यह सवाल भी उठ रहा है कि एक्सप्रेसवे जैसे हाईटेक मार्ग पर सुरक्षा इंतजामों में इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे हुई? और हादसे के बाद भी संबंधित अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस लापरवाही की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

