आगरा लाईव। ताज नगरी में दिल दहला देने वाले 8 वर्षीय मासूम हत्याकांड का अंत आखिरकार पुलिस मुठभेड़ में हो गया। 25 हजार रुपये के इनामी और इस जघन्य वारदात के आरोपी किराएदार सुनील को पुलिस ने बमरौली कटारा क्षेत्र में मुठभेड़ के दौरान गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया, लेकिन अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस पूरे घटनाक्रम ने शहर को झकझोर कर रख दिया है। घटना की शुरुआत 24 मार्च 2026 को थाना ताजगंज क्षेत्र से हुई, जब एक 8 वर्षीय बच्ची अचानक लापता हो गई। परिजनों की सूचना पर पुलिस ने तत्काल अपहरण का मुकदमा दर्ज कर कई टीमों का गठन किया और बच्ची की तलाश शुरू कर दी। अगले ही दिन पुलिस को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब बच्ची का शव उसी मकान में किराए पर रहने वाले सुनील के कमरे से बरामद हुआ। शव की बरामदगी ने पूरे मामले को सनसनीखेज बना दिया। बच्ची की गला काटकर हत्या की गई थी और शव को बेहद बेरहमी से एक छोटे आटे के कनस्तर में ठूंस दिया गया था। इतना ही नहीं, कनस्तर के ऊपर आटे की बोरी और फिर लाल रंग की रजाई रखकर उसे छिपाने की कोशिश की गई थी। इस दृश्य ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी सुनील (29), जो पेशे से पेंटर था, उसी मकान के ऊपर बने कमरे में किराए पर रहता था। वारदात के पीछे बदले की भावना थी। करीब 11 दिन पहले किराए के पैसे को लेकर बच्ची के चाचा से उसका विवाद हुआ था, जिसमें उसे थप्पड़ मारकर कमरे पर ताला लगा दिया गया था। यह अपमान उसे नागवार गुजरा और उसने इसका बदला लेने की ठान ली। वारदात वाले दिन दोपहर करीब 2 बजे बच्ची मोहल्ले के बच्चों के साथ खेलने के लिए घर से निकली थी। CCTV फुटेज में वह एक दुकान से चिप्स खरीदकर लौटते हुए दिखाई दी, लेकिन इसके बाद वह गायब हो गई। शाम तक जब वह घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की और बाद में पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने इलाके के CCTV खंगाले, मोहल्ले के घरों की तलाशी ली और अलग-अलग टीमें बनाकर जांच शुरू की। हैरानी की बात यह रही कि आरोपी सुनील भी शुरू में बच्ची को खोजने में परिवार के साथ लगा रहा और थाने जाकर गुमशुदगी दर्ज कराने में भी साथ गया। लेकिन जब पुलिस ने गहन जांच शुरू की तो वह अचानक गायब हो गया और अपने कमरे पर ताला लगाकर फरार हो गया। परिजनों के शक के आधार पर पुलिस ने कमरे का ताला तोड़ा और तलाशी ली, जहां कनस्तर में छिपा बच्ची का शव बरामद हुआ। इस खुलासे के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने फतेहाबाद रोड पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया। इसके बाद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 12 टीमें गठित कीं और उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया। लगातार दबिश और तलाश के बाद 27/28 मार्च की रात मुखबिर की सूचना पर पुलिस को पता चला कि आरोपी बमरौली कटारा क्षेत्र में मौजूद है। पुलिस टीमों ने इलाके की घेराबंदी की, लेकिन खुद को घिरता देख आरोपी सुनील ने पुलिस पर जानलेवा फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान एक उप निरीक्षक घायल हो गया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें सुनील को गोली लग गई। घायल अवस्था में उसे तुरंत अस्पताल भेजा गया, जहां उपचार के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने बिना नंबर की स्प्लेंडर मोटरसाइकिल, एक 315 बोर का तमंचा, 6 खोखा कारतूस और 3 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।पुलिस उपायुक्त नगर सैय्यद अली अब्बास के अनुसार, पूरे मामले में साक्ष्य संकलन और वैधानिक कार्रवाई जारी है।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मामूली विवाद किस तरह खतरनाक अपराध का रूप ले सकता है। मासूम बच्ची की बेरहमी से हत्या और फिर आरोपी का एनकाउंटर—दोनों ही घटनाएं समाज के लिए गहरी चेतावनी हैं।

